नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों की नजर अब सिर्फ बेसिक पे और फिटमेंट फैक्टर पर नहीं टिकी है। रेलवे कर्मचारियों के संगठन ने ताजा बैठक में एक ऐसा सवाल उठाया है, जो सीधे ट्रेन की सुरक्षा से जुड़ता है। सवाल यह कि जब लोको पायलट की ड्यूटी 9 घंटे तय है, तो उनसे 14, 16 और यहां तक कि 17 घंटे तक काम क्यों लिया जा रहा है?
संक्षेप में: क्या है पूरा मामला?
- ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) ने लोको पायलटों की लंबी ड्यूटी का मुद्दा उठाया।
- संगठन का आरोप है कि 9 घंटे के लिखित प्रावधान के बावजूद 14 से 17 घंटे तक काम कराया जा रहा है।
- TA (यात्रा भत्ता) और OT (ओवरटाइम) के भुगतान में देरी का सवाल भी रखा गया।
- ट्रैकमैन के लिए 12 किलोमीटर की कार्य-सीमा तय करने की मांग की गई।
लोको पायलट से 17 घंटे तक काम, यूनियन ने बताया सुरक्षा का सवाल
AIRF के प्रतिनिधियों ने बैठक में कहा कि नियमों में लोको पायलट से 9 घंटे से ज्यादा ड्यूटी न लेने की बात लिखी है। इसके बावजूद जरूरत का हवाला देकर कई बार उन्हें 14, 16 और 17 घंटे तक इंजन पर रखा जाता है। संगठन के मुताबिक यह सिर्फ कर्मचारियों की थकान या परेशानी का मामला नहीं है, बल्कि ट्रेन संचालन की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
सीधी बात यह है कि जिस कर्मचारी के हाथ में सैकड़ों यात्रियों से भरी ट्रेन की कमान हो, उसकी ड्यूटी के घंटे सीमा में रहें, यही यूनियन की मूल मांग है।
TA और OT का पैसा समय पर क्यों नहीं मिल रहा?
बैठक में यात्रा भत्ते और ओवरटाइम के भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी उठा। AIRF के अनुसार, रेलवे बोर्ड की ओर से बताया गया कि करीब ₹2.90 लाख करोड़ के रेलवे बजट का लगभग 95 फीसदी हिस्सा खर्च हो चुका है।
इसी पर कर्मचारी संगठन ने सवाल किया कि जब कर्मचारी लगातार ड्यूटी कर रहे हैं, तो उनके जायज TA और OT का भुगतान समय पर क्यों अटक रहा है। रेलवे कर्मचारियों के लिए भत्ते और ओवरटाइम की रकम उनकी मासिक कमाई का अहम हिस्सा होती है, इसलिए भुगतान में देरी का असर सीधे घर के बजट पर पड़ता है।
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ट्रैकमैन के लिए 12 किलोमीटर की सीमा की मांग
ट्रैकमैन की कार्य-परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। AIRF की मांग है कि ट्रैकमैन से 12 किलोमीटर से ज्यादा का काम न लिया जाए। संगठन के मुताबिक पीवी मैनुअल में यह सीमा अधिकतम 20 किलोमीटर बताई गई है। यूनियन का दावा है कि कुछ जगहों पर कर्मचारियों के संघर्ष के बाद 12 किलोमीटर की व्यवस्था लागू भी हो चुकी है, और अब इसे पूरे सिस्टम में लागू कराने की मांग रखी गई है।
रनिंग स्टाफ की ड्यूटी: आदेश में 11-12 घंटे, दावा 17 घंटे का
रनिंग स्टाफ की ड्यूटी पर AIRF ने रेलवे के एक आदेश का जिक्र किया। इसके तहत जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों से लगातार 11 घंटे तक काम लिया जा सकता है, और खास परिस्थितियों में यह अवधि 12 घंटे तक जा सकती है। लेकिन यूनियन का दावा है कि कुछ जगहों पर 17-17 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जा रही है। यानी कागज पर तय सीमा और जमीन पर हो रहे काम के बीच बड़ा फर्क है, ऐसा संगठन का कहना है।
8वें वेतन आयोग से क्यों जुड़ रहा है यह मुद्दा?
अब तक वेतन आयोग की चर्चा ज्यादातर सैलरी, पेंशन और भत्तों की गणित तक सीमित रहती थी। इस बार रेलवे कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि काम के घंटे, ओवरटाइम का समय पर भुगतान और सुरक्षित वर्किंग कंडीशन भी चर्चा के केंद्र में आएं। उनका तर्क है कि किसी कर्मचारी की असली आमदनी और नौकरी की हालत समझने के लिए सिर्फ बेसिक पे देखना काफी नहीं है। भत्ते समय पर मिलना और ड्यूटी आवर्स का पालन होना भी उतना ही जरूरी है।
8th Pay Commission अब आगे क्या?
ये मुद्दे रेलवे के एक कर्मचारी संगठन की ओर से उठाए गए हैं और इन पर रेलवे बोर्ड का आधिकारिक जवाब या फैसला अभी सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि बोर्ड इन मांगों पर क्या कदम उठाता है, और 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर बात सिर्फ वेतन-भत्तों तक रहती है या ड्यूटी आवर्स जैसे मुद्दों पर भी ठोस बदलाव दिखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
लोको पायलट की ड्यूटी कितने घंटे की तय है?
AIRF के अनुसार लोको पायलट से 9 घंटे से ज्यादा ड्यूटी न लेने का लिखित प्रावधान है। संगठन का आरोप है कि व्यवहार में इससे कहीं ज्यादा घंटे काम लिया जा रहा है।
AIRF ने 8वें वेतन आयोग की बैठक में कौन-कौन से मुद्दे उठाए?
लोको पायलट की लंबी ड्यूटी, TA और OT के भुगतान में देरी, ट्रैकमैन के लिए 12 किलोमीटर की कार्य-सीमा और रनिंग स्टाफ की लगातार लंबी ड्यूटी।
क्या रेलवे बोर्ड ने इन मांगों पर कोई फैसला लिया है?
अभी तक किसी फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है। मुद्दे बैठक में रखे गए हैं और बोर्ड की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
TA और OT का मतलब क्या है?
TA यानी Travel Allowance (यात्रा भत्ता) और OT यानी Overtime (तय घंटों से ज्यादा काम का भुगतान)।
नोट: लेख में दिए गए आंकड़े और दावे ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) की ओर से बैठक में रखे गए बिंदुओं पर आधारित हैं।






