PM Kusum Yojana | खेत में डीजल पंप चलाना हर साल महंगा पड़ता जा रहा है, और जहाँ बिजली कनेक्शन नहीं है वहाँ सिंचाई तो और भी मुश्किल है। पीएम कुसुम योजना इसी परेशानी का हल है। इस लेख में हमने योजना से जुड़े वही सवाल लिए हैं जो किसान सबसे ज़्यादा गूगल पर खोजते हैं: योजना क्या है, सब्सिडी कितनी है, रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, आपके राज्य (राजस्थान, यूपी, एमपी, हरियाणा, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक) में आवेदन कहाँ करना है, प्राइस लिस्ट क्या है और योजना कब तक चलेगी।
Quick Answer: पीएम कुसुम योजना (PM-KUSUM) केंद्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की योजना है, जो 2019 में शुरू हुई। इसमें किसान सोलर पंप लगवा सकते हैं या अपनी खाली ज़मीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बेच सकते हैं। सोलर पंप पर केंद्र सरकार 30% सब्सिडी देती है और राज्य सरकार कम से कम 30% देती है। बाकी 40% किसान को देना होता है, जिसमें से 30% तक बैंक लोन मिल सकता है, यानी शुरू में सिर्फ़ करीब 10% खर्च। आवेदन अपने राज्य की नोडल एजेंसी के पोर्टल से होता है, और केंद्रीय जानकारी pmkusum.mnre.gov.in पर है।
पीएम कुसुम योजना 2026: ताज़ा अपडेट (अक्टूबर 2026)
योजना की मूल अवधि 31 मार्च 2026 तक थी। मार्च 2026 में MNRE ने कुछ परियोजनाओं के लिए पूरा होने की समय-सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी, और अब खबर है कि कंपोनेंट A और C में फाइनेंशियल क्लोज़र की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 कर दी गई है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि 31 मार्च 2027 के बाद कोई और विस्तार नहीं मिलेगा। साथ ही नई योजना पीएम कुसुम 2.0 पर काम चल रहा है।
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| योजना की मूल अवधि | 31 मार्च 2026 तक |
| परियोजना पूरी करने की समय-सीमा | 31 मार्च 2027 (जिन परियोजनाओं में PPA/NTP 31 दिसंबर 2025 तक हुआ) |
| कंपोनेंट A और C में फाइनेंशियल क्लोज़र | 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया (1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार) |
| आगे का विस्तार | 31 मार्च 2027 के बाद नहीं, ऐसा MNRE ने कहा है |
| पीएम कुसुम 2.0 | प्रस्तावित, ब्योरा अंतिम रूप में; अभी औपचारिक लॉन्च की पुष्टि नहीं |
ध्यान रखें: व्यक्तिगत किसानों का सोलर पंप (कंपोनेंट B) मांग आधारित है और राज्यवार लक्ष्य व आवेदन की खिड़की राज्य सरकार तय करती है। इसलिए आवेदन से पहले अपने राज्य की नोडल एजेंसी की वेबसाइट पर वर्तमान सूचना ज़रूर देखें।
पीएम कुसुम योजना क्या है? (PM Kusum Yojana kya hai)
पूरा नाम है प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 19 फरवरी 2019 को मंज़ूरी दी और योजना 8 मार्च 2019 को शुरू हुई। मकसद है खेती को डीजल से मुक्त करना, किसानों की सिंचाई लागत घटाना और खाली पड़ी ज़मीन से उन्हें अतिरिक्त आमदनी दिलाना। जो किसान ज़रूरत से ज़्यादा सोलर बिजली बनाता है, वह उसे बिजली कंपनी (डिस्कॉम) को बेच सकता है।
योजना का लक्ष्य और बजट
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | पीएम कुसुम (PM-KUSUM) |
| मंत्रालय | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार |
| शुरुआत | 2019 |
| कुल सोलर क्षमता का लक्ष्य | 34,800 मेगावाट |
| केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) | ₹34,422 करोड़ |
| कंपोनेंट A का लक्ष्य | 10,000 MW के छोटे सोलर प्लांट |
| कंपोनेंट B का लक्ष्य | 14 लाख स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप (शुरुआत में 17.5 लाख) |
| कंपोनेंट C का लक्ष्य | 35 लाख ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सोलराइज़ेशन (फीडर लेवल सहित) |
| हेल्पलाइन | 1800-180-3333 (टोल फ्री) |
यानी जब कोई पूछे कि पीएम कुसुम योजना का लक्ष्य किसानों के लिए क्या है, तो जवाब है: डीजल और ग्रिड पर निर्भरता घटाना, सिंचाई सस्ती करना और किसान को बिजली का उत्पादक बनाना, जिसके लिए कुल 34,800 MW सोलर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के तीन कंपोनेंट: आपके लिए कौन सा सही है?
| कंपोनेंट | किसके लिए | क्या मिलता है |
|---|---|---|
| A: विकेंद्रीकृत सोलर प्लांट | जिनके पास खाली, बंजर या खेती की ज़मीन है (किसान, समूह, सहकारी समिति, पंचायत, FPO) | ज़मीन पर 2 MW तक का सोलर प्लांट; बिजली डिस्कॉम खरीदती है। डिस्कॉम को 40 पैसे प्रति यूनिट या ₹6.6 लाख प्रति MW प्रति वर्ष (जो कम हो) का प्रोत्साहन 5 साल तक मिलता है |
| B: स्टैंड-अलोन सोलर पंप | जहाँ ग्रिड बिजली नहीं है या डीजल पंप चल रहा है | 7.5 HP तक के पंप पर सब्सिडी (इससे बड़े पंप की अनुमति है, पर सब्सिडी 7.5 HP के हिसाब से ही) |
| C: ग्रिड पंप का सोलराइज़ेशन | जिनके पास पहले से बिजली कनेक्शन वाला पंप है | पंप को सोलर से चलाइए, फालतू बिजली डिस्कॉम को बेचिए। पंप क्षमता (kW) के दोगुने तक सोलर पैनल की अनुमति |
ज़्यादातर किसान कंपोनेंट B से जुड़ते हैं, इसलिए आगे का ज़्यादातर हिस्सा उसी पर केंद्रित है।
पीएम कुसुम योजना सब्सिडी: किसान को कितना पैसा देना होगा?
कंपोनेंट B और C में केंद्र सरकार बेंचमार्क कीमत या टेंडर कीमत (जो कम हो) का 30% देती है। राज्य सरकार कम से कम 30% देती है और बाकी अधिकतम 40% किसान को लगाना होता है। किसान बैंक से लोन ले सकता है, जिससे उसे शुरुआत में सिर्फ़ 10% देना पड़ता है और बाकी 30% तक लोन में चला जाता है।
| राज्य की श्रेणी | केंद्र (CFA) | राज्य (न्यूनतम) | किसान का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| अधिकांश राज्य | 30% | 30% | अधिकतम 40% (बैंक लोन से 30% तक, यानी शुरू में ~10%) |
| पूर्वोत्तर राज्य, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर/लद्दाख, सिक्किम, द्वीपीय क्षेत्र | 50% | 30% | अधिकतम 20% |
उदाहरण से समझिए (केवल अनुमान)
मान लीजिए किसी राज्य में आपके पंप का टेंडर रेट ₹3,00,000 है। केंद्र का 30% = ₹90,000 और राज्य का 30% = ₹90,000, यानी कुल सब्सिडी ₹1,80,000। किसान का हिस्सा बचा ₹1,20,000। इसमें से ₹90,000 बैंक लोन हो सकता है, तो शुरू में आपको करीब ₹30,000 देने होंगे। असली आंकड़े आपके राज्य के टेंडर रेट और राज्य की सब्सिडी नीति पर निर्भर करेंगे।
कुछ राज्य अपनी तरफ से सब्सिडी बढ़ाकर किसान का हिस्सा और घटा देते हैं (कई जगह SC/ST और छोटे किसानों के लिए अलग प्रावधान हैं)। ये प्रतिशत हर साल बदल सकते हैं, इसलिए अंतिम आंकड़ा राज्य की वेबसाइट से ही मिलाएँ।
पीएम कुसुम योजना प्राइस लिस्ट (Price List) और PDF
सोलर पंप की कीमत पंप की क्षमता, AC या DC, सबमर्सिबल या सरफेस, और राज्य के टेंडर पर निर्भर करती है। नीचे की तालिका सिर्फ़ मोटा अंदाज़ा देती है, आधिकारिक रेट नहीं।
| पंप क्षमता | अनुमानित कुल लागत (सब्सिडी से पहले) | 60% सब्सिडी के बाद किसान का हिस्सा (40%) | शुरू में ~10% (लोन लेने पर) |
|---|---|---|---|
| 3 HP | ₹1.8 लाख से ₹2.5 लाख | ₹72,000 से ₹1,00,000 | ₹18,000 से ₹25,000 |
| 5 HP | ₹3 लाख से ₹3.5 लाख | ₹1,20,000 से ₹1,40,000 | ₹30,000 से ₹35,000 |
| 7.5 HP | ₹4.5 लाख से ₹5 लाख | ₹1,80,000 से ₹2,00,000 | ₹45,000 से ₹50,000 |
प्राइस लिस्ट PDF कहाँ मिलेगी? सरकारी रेट राज्य की नोडल एजेंसी जारी करती है। MNRE के पोर्टल पर भी योजना से जुड़े वेंडरों और स्टैंड-अलोन पंप के रेट की जानकारी दी जाती है। इसलिए किसी भी निजी वेबसाइट की PDF पर भरोसा करने के बजाय pmkusum.mnre.gov.in और अपने राज्य की एजेंसी की साइट से रेट-लिस्ट देखें।
पीएम कुसुम योजना की पात्रता (Eligibility)
- आवेदक भारत का किसान हो और ज़मीन उसके नाम हो (या मान्य लीज/समूह का प्रावधान राज्य के नियम के अनुसार)।
- कंपोनेंट B के लिए खेत में ग्रिड बिजली कनेक्शन न हो या डीजल पंप से सिंचाई होती हो।
- कंपोनेंट C के लिए पहले से कृषि बिजली कनेक्शन वाला पंप हो।
- कंपोनेंट A के लिए आवेदक के पास सोलर प्लांट के लिए पर्याप्त ज़मीन हो; किसान, किसान समूह, सहकारी समितियाँ, पंचायतें, FPO और जल उपयोगकर्ता संघ आवेदन कर सकते हैं।
- सिंचाई का स्रोत (बोरवेल या कुआँ) उपलब्ध हो।
- नियम राज्य के हिसाब से थोड़े बदल सकते हैं, इसलिए अपने राज्य की गाइडलाइन भी पढ़ लें।
अगर आप कुसुम योजना की पात्रता PDF खोज रहे हैं, तो सबसे भरोसेमंद दस्तावेज़ MNRE की व्यापक गाइडलाइन (जनवरी 2024) है: PM-KUSUM गाइडलाइन PDF (MNRE)।
ज़रूरी दस्तावेज़
- आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक)
- ज़मीन के कागज़ात (खसरा/खतौनी, जमाबंदी या 7/12 उतारा, जैसा राज्य में चलता हो)
- बैंक पासबुक या खाते का विवरण
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- सिंचाई स्रोत (बोरवेल/कुआँ) से जुड़ी जानकारी या घोषणा-पत्र
- जाति प्रमाण पत्र (अगर राज्य में SC/ST के लिए अलग सब्सिडी हो)
सटीक सूची राज्य की एजेंसी के पोर्टल पर दी होती है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले वहीं से मिलान कर लें।
पीएम कुसुम योजना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
यह सबसे ज़रूरी बात है: पीएम कुसुम का कोई एक राष्ट्रीय फॉर्म नहीं है। केंद्र की साइट पर जानकारी मिलती है, जबकि आवेदन आपके राज्य की नोडल एजेंसी या विभाग के पोर्टल पर होता है, और वह भी तभी जब राज्य ने आवेदन की खिड़की खोली हो।

- सबसे पहले pmkusum.mnre.gov.in पर जाकर योजना की जानकारी और अपने राज्य की एजेंसी का लिंक देखें।
- अपने राज्य की नोडल एजेंसी के आधिकारिक पोर्टल (.gov.in या .nic.in) पर जाएँ।
- किसान पंजीकरण / कुसुम कंपोनेंट B (या A/C) का विकल्प चुनें।
- आधार और मोबाइल OTP से रजिस्ट्रेशन करें।
- नाम, पता, ज़मीन का खसरा/खाता नंबर, बैंक खाता और पंप की क्षमता (HP) भरें।
- ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करें।
- फॉर्म सबमिट करके पावती (acknowledgement) डाउनलोड कर लें; उस पर आवेदन नंबर होता है।
- सत्यापन और मंज़ूरी के बाद अपना हिस्सा पोर्टल या बताए गए माध्यम से जमा करें।
- अधिकृत वेंडर द्वारा पंप लगने के बाद निरीक्षण होता है और सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी होती है।
कुछ राज्यों में आवेदन ऑफलाइन या जिला कृषि/उद्यान कार्यालय के ज़रिए भी लिए जाते हैं। किसी भी हाल में बिना आधिकारिक रसीद के किसी को पैसे न दें।
पीएम कुसुम योजना स्टेटस कैसे चेक करें?
- अपने राज्य के कुसुम पोर्टल पर जाएँ जहाँ आपने आवेदन किया था।
- होमपेज पर Application Status / Track Status का विकल्प खोलें।
- आवेदन नंबर और मोबाइल नंबर (या आधार) डालें।
- स्क्रीन पर बताया जाएगा कि आवेदन जाँच में है, स्वीकृत है, भुगतान बाकी है या पंप स्थापना के चरण में है।
अगर स्टेटस नहीं दिख रहा, तो जिला स्तर के कार्यालय या राज्य एजेंसी से संपर्क करें। शिकायत हो तो केंद्र की हेल्पलाइन 1800-180-3333 पर कॉल करें या CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
पीएम कुसुम योजना ऑफिशियल वेबसाइट और ज़रूरी लिंक
| क्या चाहिए | आधिकारिक लिंक |
|---|---|
| राष्ट्रीय पोर्टल (जानकारी, FAQ, वेंडर, रेट) | pmkusum.mnre.gov.in |
| MNRE की योजना का पेज | mnre.gov.in (PM-KUSUM) |
| योजना FAQ | FAQ पेज |
| योजना की मुख्य विशेषताएँ | About / Salient Features |
| व्यापक गाइडलाइन (PDF) | गाइडलाइन PDF |
| शिकायत | pgportal.gov.in |
| टोल फ्री हेल्पलाइन | 1800-180-3333 |
सावधान: गूगल पर पीएम कुसुम के नाम से कई फर्जी साइटें चलती हैं जो रजिस्ट्रेशन फीस मांगती हैं। सरकारी साइट का पता हमेशा gov.in या nic.in पर खत्म होता है, और योजना में आवेदन के लिए कोई एजेंट-फीस नहीं लगती।
राज्यवार जानकारी: राजस्थान, यूपी, एमपी, हरियाणा, बिहार, झारखंड और अन्य
हर राज्य में अलग एजेंसी योजना चलाती है और सब्सिडी का राज्य हिस्सा भी अलग हो सकता है। नीचे ज़िम्मेदार एजेंसी की सूची है।
| राज्य | एजेंसी / रास्ता | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| राजस्थान | राज्य के कृषि/उद्यान विभाग और RRECL; आवेदन राज्य के पोर्टल पर | राजस्थान का उद्यान विभाग हेल्पलाइन 1800-180-1551 देता है; आवेदन अक्सर समय-सीमा वाली खिड़की में खुलते हैं |
| उत्तर प्रदेश | UPNEDA / कृषि विभाग | जिला कृषि कार्यालय की सूचना और नए पंजीकरण की घोषणा देखें |
| मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम (MPUVNL) | राज्य के कुसुम/सोलर पंप पोर्टल से आवेदन |
| हरियाणा | HAREDA; आवेदन आमतौर पर सरल हरियाणा पोर्टल से | राज्य सब्सिडी बढ़ाकर किसान का हिस्सा कम करता है |
| बिहार | BREDA / कृषि विभाग (DBT कृषि पोर्टल) | आवेदन राज्य की घोषणा के अनुसार |
| झारखंड | JREDA; पोर्टल pmkusum.jharkhand.gov.in | यहाँ मुख्य रूप से कंपोनेंट B सक्रिय बताया गया है |
| महाराष्ट्र | MEDA / महाऊर्जा; राज्य की सौर कृषि पंप योजना भी चलती है | राज्य योजना में किसान का हिस्सा बहुत कम रखा गया है, ब्योरा महाऊर्जा साइट पर देखें |
| गुजरात | GEDA | आवेदन GEDA के ऑनलाइन पोर्टल से |
| कर्नाटक | राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा/ऊर्जा विभाग की एजेंसी | आवेदन की अंतिम तिथि कोई राष्ट्रीय तारीख नहीं; वह राज्य की सूचना से तय होती है |
राजस्थान में पीएम कुसुम योजना
राजस्थान उन राज्यों में है जहाँ सोलर पंप का इस्तेमाल काफ़ी बढ़ा है। राजस्थान के लिए आवेदन राज्य के पोर्टल और विभागीय घोषणाओं पर निर्भर करता है। उद्यान विभाग के पेज पर आधिकारिक पोर्टल के रूप में horticulture.rajasthan.gov.in और लाभार्थी जानकारी के लिए जन सूचना पोर्टल दिए गए हैं। राजस्थान में योजना राष्ट्रीय स्तर पर 2019 में शुरू होने के बाद लागू हुई; राज्य-स्तरीय तारीख और अनुदान दर के लिए राज्य की अधिसूचना देखें।
जिन्हें योजना के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की “अंतिम तिथि” की तलाश है
पीएम कुसुम की कोई एक देशव्यापी अंतिम तिथि नहीं है। हर राज्य अपनी खिड़की खोलता है और बंद करता है, इसलिए कर्नाटक, झारखंड, एमपी या किसी भी राज्य की आख़िरी तारीख उसी राज्य की एजेंसी की सूचना में मिलेगी। केवल कंपोनेंट A और C की परियोजना-समय-सीमाएँ केंद्र ने तय की हैं (ऊपर तालिका देखें)।
क्या पीएम कुसुम योजना में किसानों को पेंशन मिलती है?
नहीं। “पीएम कुसुम योजना farmers pension scheme” जैसा खोजने वाले अक्सर दो योजनाओं को मिला देते हैं। पीएम कुसुम सोलर पंप और सोलर बिजली की योजना है, पेंशन की नहीं। किसानों की पेंशन के लिए अलग योजना प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना है, जिसमें 60 साल की उम्र के बाद ₹3,000 मासिक पेंशन मिलती है। इसकी पात्रता, उम्र और अंशदान के ब्योरे के लिए maandhan.in देखें।
पीएम कुसुम और पीएम सूर्य घर में क्या फर्क है? (PM Solar Yojana)
| पहलू | पीएम कुसुम | पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना |
|---|---|---|
| किसके लिए | किसान, FPO, पंचायत, सहकारी समितियाँ | घरेलू उपभोक्ता |
| उद्देश्य | सिंचाई के लिए सोलर पंप, खेत की ज़मीन से बिजली बेचना | घर की छत पर सोलर लगाकर बिजली बिल घटाना |
| पोर्टल | pmkusum.mnre.gov.in | pmsuryaghar.gov.in |
दोनों अलग योजनाएँ हैं। कई जगह “PM Solar Yojana” कहकर दोनों को एक जैसा बता दिया जाता है, जो सही नहीं है।
पीएम कुसुम योजना कब तक चलेगी?
मूल योजना की समय-सीमा 31 मार्च 2026 थी। अब चल रही परियोजनाओं के लिए अंतिम तारीख 31 मार्च 2027 है, और MNRE ने साफ कहा है कि उसके बाद कोई विस्तार नहीं मिलेगा। इसके बाद पीएम कुसुम 2.0 का इंतज़ार है, जिसमें फीडर-स्तर के सोलराइज़ेशन और बैटरी स्टोरेज (BESS) पर ज़ोर रहने की बात सामने आई है। लॉन्च की आधिकारिक तारीख की पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए pmkusum.mnre.gov.in और PIB की घोषणाओं पर नज़र रखें।
पीएम कुसुम योजना के फायदे
- डीजल का खर्च खत्म, सिंचाई की लागत लगभग शून्य
- सब्सिडी और बैंक लोन के कारण शुरुआती निवेश बहुत कम
- दिन में भरोसेमंद बिजली, खासकर फीडर-स्तर के सोलराइज़ेशन में
- फालतू बिजली डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त कमाई (कंपोनेंट A और C)
- बंजर या खाली ज़मीन से भी आमदनी की संभावना
- प्रदूषण में कमी और हरित ऊर्जा को बढ़ावा
आवेदन में ये गलतियाँ न करें
- आवेदन से पहले सही कंपोनेंट चुनें: नया पंप चाहिए तो B, पहले से बिजली वाला पंप हो तो C, ज़मीन से बिजली बेचनी हो तो A।
- आधार से लिंक मोबाइल नंबर ही दें, वरना OTP नहीं आएगा।
- ज़मीन के कागज़ात का नाम और आधार का नाम मिलाकर देखें।
- सिर्फ़ अधिकृत/एम्पैनल्ड वेंडर से ही पंप लगवाएँ।
- किसी एजेंट या फर्जी साइट को फीस न दें।
- आवेदन की पावती और भुगतान रसीद संभालकर रखें।
पीएम कुसुम योजना: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पीएम कुसुम योजना क्या है?
यह MNRE की योजना है जिसमें किसान सब्सिडी पर सोलर पंप लगवा सकते हैं या अपनी ज़मीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बेच सकते हैं। 2019 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य 34,800 MW सोलर क्षमता जोड़ना है।
पीएम कुसुम योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
कंपोनेंट B और C में केंद्र 30% देता है और राज्य कम से कम 30%। यानी कुल सब्सिडी आमतौर पर 60% या उससे ज़्यादा होती है, और किसान का हिस्सा अधिकतम 40% रहता है जिसमें बैंक लोन मिल सकता है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में केंद्र का हिस्सा 50% है।
पीएम कुसुम योजना में किसान को कितना खर्च आता है?
बैंक लोन लेने पर शुरुआत में सिर्फ़ करीब 10% लागत देनी होती है, और बाकी 30% तक लोन के रूप में चुकाना पड़ता है। असली रकम पंप की क्षमता और राज्य के रेट पर निर्भर है।
पीएम कुसुम योजना का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कहाँ होता है?
आवेदन आपके राज्य की नोडल एजेंसी या विभाग के पोर्टल पर होता है। केंद्र की जानकारी pmkusum.mnre.gov.in पर मिलती है। कोई एक राष्ट्रीय आवेदन फॉर्म नहीं है।
पीएम कुसुम योजना का ऑफिशियल वेबसाइट क्या है?
राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in है। हेल्पलाइन नंबर 1800-180-3333 है।
पीएम कुसुम योजना का लक्ष्य क्या है?
कुल 34,800 MW सोलर क्षमता जोड़ना, जिसमें कंपोनेंट A में 10,000 MW, B में 14 लाख सोलर पंप और C में 35 लाख ग्रिड-पंपों का सोलराइज़ेशन शामिल है।
पीएम कुसुम योजना कब तक चलेगी?
मूल अवधि 31 मार्च 2026 तक थी, लेकिन चल रही परियोजनाओं के लिए समय-सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई गई है और MNRE के अनुसार उसके बाद कोई विस्तार नहीं मिलेगा। पीएम कुसुम 2.0 पर काम चल रहा है।
क्या पीएम कुसुम में किसानों को पेंशन मिलती है?
नहीं। किसानों की पेंशन के लिए अलग योजना प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना है। पीएम कुसुम सोलर पंप और सोलर बिजली की योजना है।
सोलर पंप की अधिकतम क्षमता कितनी है?
व्यक्तिगत किसानों के लिए 7.5 HP तक। इससे बड़े पंप की अनुमति है, लेकिन सब्सिडी 7.5 HP के हिसाब से ही मिलती है।
पीएम कुसुम योजना का स्टेटस कैसे चेक करें?
राज्य के कुसुम पोर्टल पर Application Status खोलकर आवेदन नंबर और मोबाइल नंबर डालें।
निष्कर्ष
पीएम कुसुम योजना उन किसानों के लिए काम की है जो डीजल पर महंगी सिंचाई कर रहे हैं या जिनके पास खाली ज़मीन है। असली ज़रूरत यह है कि आप सही कंपोनेंट चुनें, अपने राज्य की आधिकारिक एजेंसी के पोर्टल से आवेदन करें और फर्जी साइटों से बचें। योजना के मौजूदा चरण की समय-सीमा 31 मार्च 2027 है, इसलिए अपने राज्य में आवेदन की खिड़की पर नज़र रखिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख जानकारी के लिए है। सब्सिडी प्रतिशत, रेट और आवेदन की तारीखें राज्य और समय के हिसाब से बदलती हैं; आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल से पुष्टि कर लें। ekycmitra.com कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है।
स्रोत: PM-KUSUM FAQ (MNRE), MNRE PM-KUSUM पेज, PM-KUSUM गाइडलाइन







