पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अब हाइब्रिड सोलर संयंत्र लगवाने पर भी सब्सिडी मिलेगी। अब तक हाइब्रिड सिस्टम को महंगा यानी लग्जरी आइटम मानकर इस पर छूट नहीं दी जाती थी। सरकार ने यह नियम अब बदल दिया है।
HighLights
- हाइब्रिड सोलर संयंत्रों पर अब पीएम सूर्य घर सब्सिडी मिलेगी।
- पहले इन्हें लग्जरी मानकर सब्सिडी नहीं दी जाती थी।
- तीन किलोवाट तक के संयंत्र पर केंद्र व राज्य की कुल 1,08,000 रुपये सब्सिडी मिलती है।
- शाम के समय ग्रिड पर बढ़ने वाला लोड कम करने में ये सिस्टम मददगार होंगे।
क्या बदला है नियम में?
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में तीन किलोवाट तक का सोलर संयंत्र लगवाने पर लगभग दो लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें केंद्र और राज्य की कुल 1,08,000 रुपये की सब्सिडी मिल जाती है।
अब तक यह सब्सिडी उन उपभोक्ताओं को नहीं मिलती थी जो हाइब्रिड सोलर संयंत्र लगवाते थे। नए फैसले के बाद ऐसा नहीं होगा। हाइब्रिड सिस्टम चुनने वाले उपभोक्ता भी योजना के तहत सब्सिडी के दायरे में आएंगे।
पहले क्यों नहीं मिलती थी सब्सिडी?
नेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी एसके गुप्ता के अनुसार, हाइब्रिड सोलर संयंत्र में एक विशेष प्रकार का इन्वर्टर और बैटरी लगती है। इसी वजह से यह सामान्य सिस्टम से महंगा पड़ता है। इसी कारण इसे लग्जरी आइटम माना जाता था और इस पर सब्सिडी नहीं दी जाती थी।
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Hybrid Solar Subsidy पर सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
इस फैसले के पीछे ग्रिड पर पड़ने वाले लोड की समस्या है। सोलर संयंत्रों से दिन में भारी मात्रा में बिजली बनती है, इसलिए बिजली विभाग दिन में ग्रिड से कम बिजली की मांग करता है। शाम होते ही सोलर उत्पादन बंद हो जाता है और मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे ग्रिड पर दबाव पड़ता है।
हाइब्रिड इन्वर्टर बैटरी से जुड़ा होता है। शाम को जब सोलर उत्पादन बंद होता है, तब बैटरी घर को बिजली देने लगती है। जैसे-जैसे ऐसे इन्वर्टर ज्यादा लगेंगे, शाम के समय ग्रिड पर अचानक पड़ने वाला दबाव कम होगा। इसी फायदे को देखते हुए सरकार ने इन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी देने का निर्णय लिया है।
हाइब्रिड इन्वर्टर की खासियत क्या है?
सामान्य सोलर इन्वर्टर दिन में बिजली बनाकर ग्रिड को भेजता है, जबकि घर के उपकरण ग्रिड से आने वाली बिजली से चलते हैं। ऐसे में ग्रिड की बिजली बंद होने पर सोलर उत्पादन का कोई फायदा नहीं मिलता।
हाइब्रिड इन्वर्टर बैटरी के साथ काम करता है, इसलिए ग्रिड में बिजली होने पर भी दिन में घर के सभी उपकरण सीधे सोलर ऊर्जा से चलते हैं। शाम को उपकरण बैटरी से चलते हैं। बैटरी खत्म होने पर सिस्टम अपने-आप ग्रिड से जुड़कर बिजली देने लगता है।
| बिंदु | सामान्य सोलर इन्वर्टर | हाइब्रिड इन्वर्टर |
|---|---|---|
| दिन में बिजली | ग्रिड को भेजता है | घर के उपकरण सीधे सोलर से चलते हैं |
| शाम को | ग्रिड की बिजली पर निर्भर | बैटरी से बिजली मिलती है |
| ग्रिड बंद होने पर | सोलर का फायदा नहीं | बैटरी से बिजली मिल सकती है |
| बैटरी खत्म होने पर | लागू नहीं | अपने-आप ग्रिड से जुड़ जाता है |
| पीएम सूर्य घर सब्सिडी | मिलती है | अब मिलेगी |
पीएम सूर्य घर योजना हाइब्रिड सोलर सब्सिडी पर उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने?
अब तक बैटरी वाला सिस्टम चुनने पर उपभोक्ता को पूरा खर्च खुद उठाना पड़ता था। नए नियम के बाद वे भी सब्सिडी का लाभ ले सकेंगे, जिससे बैटरी बैकअप वाला सोलर सिस्टम पहले के मुकाबले किफायती हो सकता है। सब्सिडी की अंतिम राशि और प्रक्रिया के लिए अपने राज्य की नोडल एजेंसी या अधिकृत वेंडर से जानकारी जरूर ले लें।
Solar Panel Subsidy India से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ’s)
क्या हाइब्रिड सोलर सिस्टम पर अब सब्सिडी मिलेगी?
हां, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में अब हाइब्रिड सोलर संयंत्र लगवाने पर भी सब्सिडी मिलेगी।
पहले हाइब्रिड सोलर पर सब्सिडी क्यों नहीं मिलती थी?
विशेष इन्वर्टर और बैटरी की वजह से यह सिस्टम महंगा होता है, इसलिए इसे लग्जरी आइटम माना जाता था।
तीन किलोवाट सोलर संयंत्र पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
तीन किलोवाट तक के संयंत्र पर लगभग दो लाख रुपये के खर्च में केंद्र व राज्य की कुल 1,08,000 रुपये सब्सिडी मिलती है।
हाइब्रिड इन्वर्टर से ग्रिड को क्या फायदा होगा?
शाम को सोलर उत्पादन बंद होने पर घर बैटरी से चलता है, इसलिए ग्रिड पर अचानक लोड नहीं बढ़ता।
बैटरी खत्म हो जाए तो क्या होगा?
बैटरी खत्म होने पर हाइब्रिड इन्वर्टर अपने-आप ग्रिड से जुड़कर घर को बिजली देने लगता है।






